कहाँ गए वो दिन

गर्मी के पसीनो में
याद आ गए वो बीते दिन
बचपन के वो प्यारे प्यारे
मस्ती में बीते दिन।

वो दिन के कड़कती धुप में
नंगे पाँव आँगन में घूमना
डांट पड़ने पर फिर
दोड कर घर चले आना।

धुप में सुखाये अचार की अमिया को
चिडियों से बचाना
फिरे चुपके से इधर उधर देख
ख़ुद ही खा जाना।

भोजन के समय
भूख न होने का बहाना बनाना
फिर बाग़ के आम तोड़
छिप कर खाना।

शाम के वक्त वो
लॉन में शटल खेलना,
थक जाने पर
ठंडी ठंडी आइस क्रीम खाना।

बत्ती चले जाने पर
भूतों की कहानी सुनना,
डर लगने पर फिर
भजन गाने लगना।

सोने के वक्त
चारपाई का बाहर बिछाना,
नींद न आने पर
तारे गिन गिन कर फिर सो जाना।

कहाँ गए वो बेफिक्र दिन
वो निश्चल दिन,
वो लड़कपन के प्यारे दिन
कहाँ गए वो दिन बीत।

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2 thoughts on “कहाँ गए वो दिन

  1. Bahut hi pyari kavitha!

    Waise poochna chahti thee, agar aapko aiteraaz na ho tho, aapke neighbour lady ke baarey mein jo roz aakar aapke wardrobe aur kitchen inspect kiya karti thi? Does she do that even now? 🙂

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